स्वतंत्रता सेनानी (Freedom Fighter)
अस्वीकरण - प्रस्तुत कविता मैंने महारानी लक्ष्मी बाई की जीवनी पर आधारित एक चलचित्र को देख कर लिखी थी।
उनकी रगों में खून नहीं जलते अंगारे बहते हैं।
धरती पर जो गिरा वो, तो हर सीने में आग लगाते हैं।
उनको याद करके आज भी आँखें भर आती हैं।
वो रानी थीं, महारानी थीं,
उनके लिए वीर की संज्ञा भी छोटी पायी है।
उनकी गर्जना, काल चक्र को हरा कर
आज भी कानों तक आयी है।
ये कहानी किसी एक की नहीं,
ये संज्ञा तो लाखों माटी के वीरों ने पायी है।
कैसा था वो देश प्रेम,
जो हंसते हंसते फाँसी झूली है।
उनकी ही बदौलत आज ये आज़ाद शाम आयी है।
वो आज़ादी के प्यारे,
वो माटी को माँ कहके माटी में मिलने को चले,
असहायों के मन में वो प्रखर ज्वाला बनके जले,
धन्य है ये भूमि जिसने ऐसे-ऐसे वीर जने,
सौ ज़ख्म खा के भी जो सहस्त्रों का काल बने,
और उससे भी ज्यादा वो हर दिल की आवाज़ बने।
ये ज़िम्मेदारी है हमारी, वो इतिहास न धुंधला पड़े,
याद रखना है उनको जिनसे ये देश महान बने।
![]()
सभी भारतीयों को आज़ादी के ७५वें अमृत महोत्सव की हार्दिक बधाईयां एवं शुभकामनाएं।
A warm and hearty congratulations to all my fellow Indians on this auspicious occasion of 75th Independence Day.
x-x-x-x-x-x
संपादन में सहयोग करने के लिए मेरी मित्र शोमिता यादव और अंशुल गुप्ता को बहुत-बहुत धन्यवाद।
Editing credits – Shomita Yadav and Anshul Gupta
Comments
Post a Comment