चुप्पी तोड़ो (Break the Silence)
चुप्पी तोड़ो, ऑंखें खोलो
सत्य को देखो, औंधा पड़ा
अपनी वाणी की शक्ति जानो
सत्य को फिर से सबल बना
अब तो लगता जान की
कोई कीमत नहीं रह गयी है
हस्ते हस्ते वो गले काटते
फिर मिलता उन्हें भोलेपन का दर्जा
औरंगज़ेब, बाबर, टीपू, तैमूर
क्या अब भी इनकी छाप बाकी है
मज़हब के नाम पर निर्मम हत्या
न जाने कब लगेगा उनको अपराध बड़ा
वह भोला भाला व्यक्ति
क्या थी उसकी गलती
न सोचना वो कोई अंजान था
वो अपना ही था जो अब नहीं रहा
बाहर वालों को क्या कोसें
अपने लोग भेदी बने हैं
अपने ही घर को ढ़हा रहे
न जाने क्यों कर भला
ये कोई नई बात नहीं
ये कोई पहली बार नहीं हैं
ये तो सदियों से खेल चल रहे
न जाने कब अंत भला
उपाय एक ही है
आँख के बदले आँख नहीं
मगर चुप्पी का कोई लाभ नहीं है
सत्य को फिर से सबल बना
प्रेम मत भूलो, ज़हर मत उगलो
पर सत्य को थामो वाणी में
सत्य जो हुआ ओझल नज़रों से
फिर बह जाएगी लहू धारा
चुप्पी तोड़ो, ऑंखें खोलो
सत्य को देखो, औंधा पड़ा
अपनी वाणी की शक्ति जानो
सत्य को फिर से सबल बना
Udaipur incident is a gruesome act of terror and cannot be labeled as a mere provocation caused just because sentiments got hurt. We should not remain silent, we need to see the truth and be the voice for the truth.
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संपादन में सहयोग करने के लिए मेरी मित्र शोमिता यादव को बहुत-बहुत धन्यवाद।
Editing credits – Shomita Yadav
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