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एक सुहागरात

अस्वीकरण - इस कहानी में अश्लीलता का कोई अंश नहीं है। इसमें बस प्रेम के भिन्न आयामों को दर्शाने का प्रयास किया गया है।   प्रेम एक अद्भुत अन्वेषण , एक अद्भुत अलंकार , एक अद्भुत स्वीकरण। वो बड़ी शांत उस कमरे में बैठी थी। कमरे में कोई और नहीं था। उस कमरे की सजावट उस रात के होने वाले जश् ‍ न जैसी थी क्योंकि उस जैसी रात उनके जीवन की पहली रात थी। आज उसे अपने नए अनुभव की नयी सीमा मिलने वाली थी। वो रात सुहागरात थी। उस कमरे में बहुत कम रोशनी थी और मंद लाल रोशनी बड़े ही उच्च स्वरों में बिखर रही थी। उस कमरे का सबसे ज्यादा भाग जिस चीज ने घेरा था वो था बिस्तर , जिसके ऊपर फूल ही फूल बिखरे थे और उसके हर कोने पर ढेरों फूलों की लड़े अंत हो रही थीं जो की पूरे बिस्तर को हर तरफ से घेरे हुए थीं और वो उसी बिस्तर पर बैठी थी। ऐसा लग रहा था की जैसे वो एक छोटे मगर बड़े ही आलीशान से सपनों के महल में बैठी हो। वो बड़ी सकुचाई सी अपने आप को समे...