मुफ्त का ज्ञान

 हाथ से हाथ के स्पर्श में मशगूल हो तुम,

रूह से रूह की गुफ़्तगू भूले हो ।

बातें ही बातें ढेरों बातों में गुम हो तुम,

आँखों से आँखों की बात भूले हो ।

नज़दीकियों के सिलसिलों में चिड़े बैठे हो तुम,

दूरियों के होसलों को भूले हो ।

कितनो के पीछे भागके हाफेँ हो तुम,

साथ चलने की मौज भूले हो ।

मोहब्बतों की ज़रूरत में खोये हो तुम,

की मोहब्बत के एहसास को भूले हो ।

प्यार को सोने की ज़ंजीर बनाके रोये हो तुम,

की प्यार के आज़ाद अंदाज़ भूले हो ।

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