ईश्वर की ओर
ढूंढ़ना मुझको है तो ढूंढ़ो तितली के नए रंगो में
ढूंढ़ो मुझको चिड़िया के नए मधुर सुरीले गीतों में
मिल जाउँगा मैं जो ढूंढ़ो फूलों की सुनहरी खुशबू में
हूँ मैं बैठा बहते पानी के कल-कल करते गीतों में
हरा रंग मैं बनके बैठा सहस्त्रों लहरा रहे इन पत्तों में
क्या तुम स्वर्ग जाने के पीछे पड़े हो, वो मेरा स्थान नहीं
ढूंढ़ो मुझको अपने मन में मिल जाऊंगा वहींं कहीं
क्या तुम मुझको बचाने चले हो, मैं तो बसता हूँ कण-कण में
क्या तुम मुझसे मिलने चले हो, मैं तो रहता हूँ हर दिल में
ना जाने क्या पाना चाहते हो तुम इतना पैसा और ताकत कमा के
मुझसे अधिक बहुमूल्य कोई चीज़ नहीं, और सबसे ज्यादा मैं इस जग में ।
Manu vani like Kabir Vani 👍
ReplyDelete😄
Delete👍
ReplyDeleteAwesome, I’m proud of you😘
ReplyDeleteThank you chachi
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