दुल्हन को पिता का आशीर्वाद
नाज़ुक कली नासों पली, अब तू सुंदर फूल बन खिली,
कल तक ये अंगना महका था, अब तू बनी उस आंगन की तुलसी ।
याद है मुझको तू कहती थी, जीवन भर साथ दूंगी पापा,
लेकिन आज तू भी बेटी, इस विधान को बदल न सकी ।
तेरी याद बहुत आएगी, बचपन के तेरे खेल सुहाने,
पीठ पे मेरी चढ़कर घूमती, और फिर तेरी वो प्यारी हँसी ।
जाने का तेरा वक़्त हुआ है, आखरी बात तू सुनती जा,
आनंदमए हो तेरा जीवन, आशीर्वाद तू लेती जा यही ।
नाज़ुक कली नासों पली, अब तू सुंदर फूल बन खिली,
कल तक ये अंगना महका था, अब तू बनी उस आंगन की तुलसी ।
Nice
ReplyDeleteThanks
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