प्रेम कहानी

अस्वीकरण - इस कहानी का वास्तविकता से कोई सम्बन्ध नहीं है। मौज में लिखी कहानी है, पढ़के मौज कीजिएगा।



एक लड़का था एक लड़की थी, और वो दोनो एक दूसरे को पसंद करते थे। मगर उनका प्यार की अभिव्यक्ति कुछ पुराने तरीके वाली थी। न कभी एक दूसरे से मिलते न बात ही करते, बस एक दूसरे को छुप-छुपके देखा करते थे। एक दूसरे से प्यार करते थे मगर व्यक्त करने में शरमाते थे। एक दिन ऐसा हुआ की वो दोनो अकस्मात ही एक दूसरे के आमने सामने आ ही गऐ, और तब लड़के ने बड़ी कोशिश करके अपनी भावनाओं को व्यक्त किया ऐसा कहकर-


    तुम्हे देखता हूँ तो सोचता हूँ, समय रुक जाता तो अच्छा होता,
    न तुम नज़रें झुकाती न ज़माने का ख्याल आता।
    बस ये खुबसूरत निगाहें होती, ये प्यारी मुस्कुराहटे होती,
    जो न होता वो तुमसे दूर जाने का ख्याल न होता।


ये सुनकर लड़की मुस्कुराई और उन दोनो में दोस्ती हो गई। वो अब मिलते भीथे और बातें भी करते थे। मगर एक दिन लड़की कुछ उदास थी। लड़के के बहुत पूछने पर भी अपनी उदासी का करण नहीं बता रही थी। लड़की के ऐसे व्यवहार को देख लड़का निराश और परेशान हो गया और उसने अपनी निराशा व्यक्त की ऐसा कहकर-


    लोग आते जा रहे और ये वक्त बहता जा रहा,
    मेरी आँखों पे परदा नहीं मगर कुछ है तेरी आँखों में जो मुझसे बचता जा रहा,
    कुछ है जो तुम बोल रही हो और मैं सुन नहीं पा रहा,
    कुछ है तुम्हारे चेहरे पर लिखा मगर मैं पढ़ नहीं पा रहा।

    तुम्हे आज देखा तो मैंने ये समझा की हाँ,
    मुझे प्यार तुमसे नहीं तेरे दिए लमहों से था।
    मुझे प्यार तेरी आँखों से नहीं तेरे नजरिये से था।
    मुझे प्यार अपनी सेहत से नहीं तेरी फिक्र से था।

    आज ये पल बता रहा कि तेरा वो नजरिया आज किसी और फिक्र में डूबा है,
    ऐसा लगता है जैसे समुद्र में कहीं हवा का बुलबुला छुपा बैठा है,
    धनगोर बरिश में कहीं कोई पत्ता सूखा रह गया है,
    बहती हवा में किसी अंजान बात का बसेरा है।

    वो क्या है जो मेरे दिल के नहीं सिर्फ तेरे दिल के पास है,
    बहुत कोशिश की तुमने छुपाने की मगर हर कोशिश नाकाम है,
    बतादे मुझे तेरे दिल में दबी वो क्या बात है,
    तेरे मन के अंजान गीत को गाना मेरी कलम की अखरी चाह है।


लड़के के इतने प्रयासों के बाद भी लड़की ने उसे अपने मन की बात नहीं बताई। बहराल, समय के साथ उनका रिश्ता और गहरा एवं दृढ़ होता गया। और एक दिन लड़के ने सोचा की शायद अब वो समय आ गया है जब उन्हें अपने दोस्ती के रिश्ते को जीवन भर के साथ में बदलना चाहिए। ऐसा सोचकर वो लड़की को डिनर डेट पे लेके गया और प्रपोस़ करते हुए ऐसा कहा-


    दूर तो चाँद भी है, उसे तो नहीं भूलते हम।
    तुम तो इतने दूर भी नहीं, चाँद से पत्थर भी नहीं।
    ये तो वक्त की बात है, डरता हूँ वक्त बेवक्त न बन जाए।
    तुम इतने खूबसूरत जो हो डरता हूँ किसी रोज़ ये शायर ना चीज़ न बन जाए।
    इन दूरियों पे नजर तेरी भी है और मेरी भी, देखना है किस नजर पे ये दूरियाँ फना हो जाए।
    अब चाहें जो भी हो अंजाम इस किस्से का, देखना है की वो अंजाम मेरी जिंदगी बन जाए।


लड़का यह कहकर चुप हो गया और लड़की के उत्तर की प्रतीक्षा करने लगा। लड़की पहले तो कुछ न बोली, मगर फिर उसने दुख भरी आँखों से उसके प्रस्ताव को अस्वीकृत कर दिया। अस्वीकृती का कारण शायद वही था जिस कारण से वह उस दिन उदास थी। मगर अब जब उसने लड़के के जीवन से जाने का निर्णय ले ही लिया तो लड़के ने इस कहानी का सारांश दो पक्तियों में व्यक्त किया ऐसा कहकर-


    मैं तुम्हारा दिल नहीं तोड़ना चाहती, वो ये कहकर मेरा दिल तोड़के चली गई।
    अरे हम तो तैयार थे हवाओं के हर तौर सहने को,
    कम्बख्त ये हवा मेरी सांस बनकर मुझे छोड़कर चली गई।


                           -x-x-x-x-x-

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