राम तुम कहाँ हो ?
क्या तुमने मार दिया सभी रावण को, क्या जीत लिया लंका के सभी राक्षसों को, क्या पूरा दानव संहार हो गया उसी रात को, क्या अब कोई सीता नहीं वाटिका से छुड़ाने को, आज भी दिख रहा रावण प्रताड़ित करता समाज को, करता है वे परेशान दुर्बल और कमजोरों को, ये किसी भी रूप में आ सकता पहचानना मुश्किल है इन रावण को, राम... क्या तुम हमारे रक्षक नहीं ? समाज तुम्हे ढूढ़ रहा, राम तुम कहाँ हो ? ये सिर्फ उनमें नहीं जो उठाते हथियार हैं, ये तो उनमें भी है जो उठाते सत्ता का भार हैं । ये सिर्फ उनमें नहीं जो बोल नफरत के बोलते हैं, ये तो उनमें भी है जो ज्ञान का पाठ पढ़ाते हैं । ये सिर्फ उनमें नहीं जिनसे हम अंजान हैं, ये तो शायद उनमें भी है जो हमारे साथ हैं । न जाने ये कहाँ से आए हैं, इन रावण को तुम अपने समाज का ही हिस्सा जान लो । राम... क्या तुम हमारे रक्षक नहीं ? समाज तुम्हे ढूढ़ रहा, राम तुम कहाँ हो ? अगर रावण इस समाज का हिस्सा है तो राम भी यहीं हैं, अगर रावण अब अनेक हैं तो राम भी कम नहीं हैं । दोस्तों सोचना होगा हमें ये किसकी जिम्मेदारी है, समाज को रावण मुक्त बनाना क्या ये हमारा भ...