प्रेम कहानी
अस्वीकरण - इस कहानी का वास्तविकता से कोई सम्बन्ध नहीं है। मौज में लिखी कहानी है, पढ़के मौज कीजिएगा। एक लड़का था एक लड़की थी, और वो दोनो एक दूसरे को पसंद करते थे। मगर उनका प्यार की अभिव्यक्ति कुछ पुराने तरीके वाली थी। न कभी एक दूसरे से मिलते न बात ही करते, बस एक दूसरे को छुप-छुपके देखा करते थे। एक दूसरे से प्यार करते थे मगर व्यक्त करने में शरमाते थे। एक दिन ऐसा हुआ की वो दोनो अकस्मात ही एक दूसरे के आमने सामने आ ही गऐ, और तब लड़के ने बड़ी कोशिश करके अपनी भावनाओं को व्यक्त किया ऐसा कहकर- तुम्हे देखता हूँ तो सोचता हूँ, समय रुक जाता तो अच्छा होता, न तुम नज़रें झुकाती न ज़माने का ख्याल आता। बस ये खुबसूरत निगाहें होती, ये प्यारी मुस्कुराहटे होती, जो न होता वो तुमसे दूर जाने का ख्याल न होता। ये सुनकर लड़की मुस्कुराई और उन दोनो में दोस्ती हो गई। वो अब मिलते भीथे और बातें भी करते थे। मगर एक दिन लड़की कुछ उदास थी। लड़के के बहुत पूछने पर भी अपनी उदासी का करण नहीं बता रही थी। लड़की के ऐसे व्यवहार को देख लड़का निराश और पर...